जो बीत गया,
उसे सम्मान के साथ विदा करता हूँ।
उसने मुझे अनुभव दिए,
कुछ मुस्कानें,
कुछ सीखें,
और समय की अनमोल समझ।
अब मैं पीछे नहीं देखता,
न किसी शिकायत के साथ,
न किसी पश्चाताप के साथ।
जो था, वह अपनी जगह पूर्ण था,
जो है, वही मेरा सत्य है।
मैं नए प्रभात की ओर बढ़ रहा हूँ,
मन में विश्वास लिए,
हृदय में शांति लिए,
और आँखों में नए स्वप्न लिए।
न किसी से स्पर्धा,
न किसी से अपेक्षा,
केवल अपने पथ पर
सजग और दृढ़ कदम।
यदि राह में फूल मिलें,
तो कृतज्ञ रहूँगा;
यदि शूल मिलें,
तो धैर्य रखूँगा।
क्योंकि अब समझ लिया है—
हर मौसम का अपना महत्व होता है।
आज मैं स्वयं से एक वचन लेता हूँ—
जीवन की शेष यात्रा
सकारात्मकता, स्नेह और सृजन के साथ जीऊँगा।
जहाँ तक संभव होगा,
प्रकाश बाँटूँगा,
और जहाँ अंधेरा होगा,
वहाँ एक दीप अवश्य जलाऊँगा।
यह अंत नहीं,
एक नया अध्याय है।
एक नई कहानी,
जो आशा, आत्मविश्वास और संतुलन के शब्दों से लिखी जाएगी।
मैं तैयार हूँ—
मुस्कुराकर,
नम्रता के साथ,
पर अपने संकल्प में अडिग होकर।
और यही मेरा नया आरम्भ है।