आज की कविता

नव वर्ष 2026

नववर्ष 2026

कैलेंडर बदला है,
पर समय अब भी
मन के दरवाज़े पर
धीमे से दस्तक देता है।

पीछे छूटी हुई थकान
आज बोझ नहीं,
अनुभव बनकर
कंधे से उतर रही है।

जो कहा नहीं गया
वह भी साथ चला आया,
और जो खो गया
उसने लौटना सिखा दिया।

यह नया वर्ष
बस इतना कहता है,
अब ठहराव में भी
आगे बढ़ना संभव है।

चलो,
इस बार तेज़ नहीं,
सच के साथ चलें,
जहाँ मौन भी
पूरा वाक्य हो।

“अरुण वीर सिंह “
1.1.2026 

नया सूरज
आपके लिए
शौर्य और यश की उजास लाए,
और चाँद
अपनी शीतलता
मन तक उतार दे।
नववर्ष की मंगलकामना ।

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